
नई दिल्ली: कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों और प्रमुख बैंकों के बीच अनैतिक सांठगांठ का आरोप लगाया है।
कैट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमर पारवानी और प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी ने आरोप लगाया कि एचडीएफसी, एसबीआई, आईसीआईसीआई, एक्सिस बैंक और अन्य प्रमुख बैंकों ने विशेष छूट योजनाओं और कैशबैक ऑफर्स के माध्यम से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को समर्थन प्रदान किया है। इसके परिणामस्वरूप पारंपरिक खुदरा व्यापारियों को गंभीर वित्तीय नुकसान हो रहा है और प्रतिस्पर्धा का माहौल अस्वस्थ हो गया है।
कैट ने इन बैंकों और ई-कॉमर्स कंपनियों के बीच गठबंधन को कार्टेल के रूप में वर्णित किया है, जो पारंपरिक व्यापारियों के मौलिक अधिकारों और आत्मनिर्भर भारत के विज़न के खिलाफ है। सीसीआई की हालिया रिपोर्ट में भी यह खुलासा हुआ है कि ये कंपनियाँ स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों के साथ मिलकर राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर रही हैं।
इस स्थिति से प्रभावित 1.5 लाख मोबाइल खुदरा व्यापारियों में से 50,000 से अधिक छोटे व्यापार पहले ही बंद हो चुके हैं, और कई अन्य ग्रे मार्केट स्टॉक्स पर निर्भर हो गए हैं। यह स्थिति देश की घरेलू अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।