Friday, April 4, 2025
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बोइंग ने भारत में 180 कर्मचारियों की छंटनी की, कंपनी वैश्विक स्तर पर कर रही है कर्मचारियों की संख्या में कटौती

गलुरू। अमेरिकी विमानन कंपनी बोइंग ने बेंगलुरू स्थित अपने इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी केंद्र से 180 कर्मचारियों को निकाल दिया है। यह कदम कंपनी के वैश्विक स्तर पर अपने कर्मचारियों की संख्या में कटौती की योजना का हिस्सा है। बोइंग के भारत में लगभग 7000 से अधिक कर्मचारी हैं, और बेंगलुरू और चेन्नई में बोइंग इंडिया इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (बीआईईटीसी) के जरिए विमान निर्माण से जुड़ी अत्याधुनिक वैमानिकी परियोजनाओं पर काम किया जाता है।

कंपनी द्वारा की गई छंटनी के कारण
कंपनी के एक प्रवक्ता ने बताया कि कुछ पुराने पदों को समाप्त किया गया है, वहीं कुछ नए पद भी बनाए गए हैं। इसका उद्देश्य ग्राहकों की सेवा, सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को बनाए रखते हुए अपने कामकाजी ढांचे को और संतुलित करना है। बोइंग ने यह भी कहा कि कंपनी को विभिन्न वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण वह अपनी कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की संख्या को फिर से संरचित कर रही है।

बोइंग के भारतीय केंद्र का महत्व
बेंगलुरू स्थित बोइंग का इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी परिसर अमेरिका के बाहर कंपनी का सबसे बड़ा निवेश है। बोइंग हर साल भारत में 300 से अधिक आपूर्तिकर्ताओं से लगभग 1.25 अरब डॉलर की खरीद करता है।

बोइंग की वैश्विक चुनौती और रणनीतिक समायोजन
वर्तमान समय में बोइंग विभिन्न वैश्विक आर्थिक और तकनीकी चुनौतियों का सामना कर रही है, और इसी कारण कंपनी ने अपने वर्कफोर्स में पिछले साल 10 प्रतिशत कटौती का निर्णय लिया था। हालांकि, हाल की छंटनी के बारे में कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सूत्रों का कहना है कि इस स्ट्रैटेजिक एडजस्टमेंट के तहत कुछ पदों को प्रभावित किया गया है, लेकिन कंपनी यह सुनिश्चित कर रही है कि इसका ग्राहकों और सरकारी परिचालनों पर कोई असर न पड़े।

अमेरिकी राष्ट्रपति से मिला बड़ा कॉन्ट्रैक्ट
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बोइंग को अमेरिकी वायुसेना के लिए अब तक का सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान बनाने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। इसके चलते बोइंग के शेयरों में जबरदस्त उछाल आया है। “नेक्स्ट जनरेशन एयर डोमिनेंस” कार्यक्रम के तहत अमेरिकी वायुसेना के लिए बनाए जाने वाला छठी पीढ़ी का यह फाइटर जेट, जिसे एफ 47 नाम दिया गया है, पांचवीं पीढ़ी के एफ-22 रेप्टर को बदलने के लिए डिज़ाइन किया जाएगा।

निष्कर्ष
बोइंग का यह कदम कंपनी के सामरिक समायोजन और वैश्विक संचालन को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाने का हिस्सा है। हालांकि, कर्मचारियों की छंटनी के बावजूद, कंपनी को उम्मीद है कि यह समायोजन उसके दीर्घकालिक लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेगा और इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को बनाए रखेगा।

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