
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महादेव ऐप के मामले पर भाजपा और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि महादेव ऐप के संचालकों को भाजपा का संरक्षण प्राप्त है और यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार, विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह, इस मामले में महादेव ऐप के संचालकों को संरक्षण दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा:
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महादेव ऐप के संचालकों सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ जो छापेमारी हुई है, उसका असली उद्देश्य उनके खिलाफ कार्रवाई न करना है, क्योंकि यह लोग दुबई में आराम से रह रहे हैं और भाजपा के संरक्षण में हैं।
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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईडी ने छत्तीसगढ़ के अखबारों में झूठी खबरें फैलायीं कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को गिरफ़्तार कर लिया गया है, जबकि असल में वे दुबई में थे और वहाँ पंडित प्रदीप मिश्रा के जजमान बनकर प्रवचन सुनते देखे गए।
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बघेल ने यह स्पष्ट किया कि महादेव ऐप के खिलाफ सबसे पहले कार्रवाई उनकी सरकार के दौरान मार्च 2022 में हुई थी, और राज्य सरकार ने ही महादेव ऐप के खिलाफ पहला एफआईआर दर्ज किया था। इसके बाद लगातार छापेमारी और कार्रवाई की गई।
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बघेल ने कहा कि हमारी सरकार ने ही महादेव ऐप को गूगल प्ले स्टोर से हटवाया और केंद्रीय गृहमंत्रालय को इसके संचालकों की गिरफ्तारी के लिए पत्र लिखा था, लेकिन इसके बावजूद महादेव ऐप पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई।
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उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के दौरान की गई कार्रवाई के बाद जब भाजपा सत्ता में आई, तब से महादेव ऐप पर कोई कार्यवाही नहीं हुई और भाजपा की सरकार ने इस मामले में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए।
संरक्षण के सबूत:
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बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने वानुआतु की नागरिकता प्राप्त की है, क्योंकि वानुआतु के साथ भारत की प्रत्यार्पण संधि नहीं है, जिससे ये संचालक आसानी से दुबई में रहकर अपने व्यवसाय चला रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि आरटीआई के जरिए जो दस्तावेज प्राप्त हुए हैं, उससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय वाणिज्य दूतावास के पास इन दोनों संचालकों को गिरफ्तार करने के लिए कोई दस्तावेज नहीं हैं, और भारत सरकार ने इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया।
छापे का षडयंत्र:
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बघेल ने कहा कि सीबीआई ने उनके रायपुर स्थित शासकीय निवास में बिना सूचित किए और बिना उनकी सहमति के छापा मारा। उन्होंने इसे एक नाटकीय षडयंत्र करार दिया और कहा कि छापे के दौरान कोई महिला अधिकारी नहीं थी, जो मानवाधिकार हनन और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है।
बघेल ने यह भी बताया कि उनकी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बाद अब राज्य में महादेव ऐप के संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे यह साबित होता है कि भाजपा और केंद्र सरकार इस मामले में कोई वास्तविक कार्रवाई नहीं करना चाहती।
