
रायपुर। सलमान खान की फिल्म ‘सिकंदर’ अब तक की सबसे विवादास्पद फिल्मों में से एक बनकर सामने आई है। इस फिल्म के बारे में दावा किया जा रहा है कि इसका कोई ऐतिहासिक संदर्भ नहीं है, बावजूद इसके फिल्म का नाम ‘सिकंदर’ रखा गया है। यह फिल्म पूरी तरह से प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ के शीर्षक गीत पर आधारित प्रतीत होती है, जिसमें ‘हमने माना ये जमाना दर्द की जागीर है’ जैसे चर्चित बोल हैं। फिल्म के कथानक का निर्माण फिल्म ‘एनिमल’ के हार्ट ट्रांसप्लांट के आइडिया से किया गया है, लेकिन सलमान खान के नाम पर फिल्म में उनकी शख्सियत की छाया नज़र आती है।
जहां एक वक्त था जब सलमान की फिल्में सिनेमाघरों में हाउसफुल चली जाती थीं, वहीं अब वह दौर खत्म होता नज़र आ रहा है। ‘जय हो’, ‘रेस 3’, ‘दबंग 3’ और ‘टाइगर 3’ जैसी फिल्मों ने सिर्फ सलमान खान के नाम पर बड़ी सफलता हासिल की, लेकिन ‘सिकंदर’ के साथ ऐसा कुछ नहीं हो पाया। फिल्म के पहले शो में ही सिनेमाघरों में खाली सीटें दिखीं, जो दर्शक और फिल्म की स्टोरीलाइन में एक बड़ी दूरी का संकेत देती हैं।
फिल्म की शुरुआत कुछ ऐसी लगती है जैसे वह सूरज बड़जात्या की फिल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ के 10 साल पुराने सेट से सीधे आई हो। सलमान खान यहां एक रियासत के राजा के रूप में हैं, जिनकी कद काठी में परिवर्तन साफ नज़र आता है। कई बार ऐसा लगता है जैसे सलमान की जगह कोई और कलाकार फिल्म में नजर आ रहा हो। फिल्म में उनका और रश्मिका मंदाना का प्यार दर्शकों के लिए अव्यक्त प्रतीत होता है, जहां उनका रियल और स्क्रीनप्ले के बीच कोई तालमेल नहीं बैठता।
कहानी के भीतर कुछ बेतुकी स्थितियां भी सामने आती हैं। प्रतीक बब्बर की उपस्थिति में एक कहानी की शुरूआत होती है, लेकिन उसके बाद कहानी का मोड़ ऐसा आता है कि लगता है फिल्म ने कोई ठोस दिशा पकड़ने के बजाय ढेर सारी पंक्तियों को जोड़ने की कोशिश की है। फिल्म की पटकथा और संवाद भी बिखरे हुए हैं, जो बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों से प्रेरित प्रतीत होते हैं। फिल्म में जहां जहां किसी कनेक्शन की जरूरत नहीं थी, वहां भी हास्यास्पद तरीके से संवाद डाले गए हैं।
सलमान खान की एक्टिंग में भी एक प्रकार की लापरवाही देखी जाती है। दर्शकों की उम्मीदें अब पहले जैसी नहीं रहीं। पहले वह अपने अभिनय के लिए मेहनत करते थे, लेकिन अब वह सिर्फ अपने प्रशंसकों पर एहसान जताते हुए नजर आते हैं। उनके अभिनय में अब वह गहराई या इमोशन नहीं दिखता, जो पहले उनकी फिल्मों में हुआ करता था।
फिल्म में अभिनय की बात करें तो, रश्मिका मंदाना को देखकर ऐसा लगता है जैसे उन्हें एक्टिंग करने की कोई आवश्यकता नहीं थी, उनका नाम ही फिल्म को हिट कराने के लिए पर्याप्त था। ए. आर. मुरुगादॉस के निर्देशन में फिल्म की कास्टिंग भी निराशाजनक रही। मुरुगादॉस ने कई कलाकारों को जोड़ा, लेकिन किसी भी कलाकार की अदाकारी में दम नहीं दिखाई दिया।
फिल्म के संगीत के मामले में उस्ताद प्रीतम और समीर आंजान का काम सराहा जा सकता है, लेकिन इस फिल्म का म्यूजिक शायद अगले ईद तक ही याद रखा जाए।
कुल मिलाकर, ‘सिकंदर’ एक और फिल्म साबित हुई है जो सलमान खान के नाम और इमेज को पूरी तरह से कमज़ोर करती है। फिल्म के विषय, निर्देशन और कलाकारों की अदाकारी को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं नकारात्मक रही हैं। सलमान खान को अब अपने प्रशंसकों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए कुछ नया करना होगा, ताकि वह फिर से अपने पुराने दिन वापस ला सकें।
ईद की मुबारकबाद के साथ: इस फिल्म की असफलता के बावजूद, सलमान खान के प्रशंसक उन्हें हमेशा की तरह समर्थन देने के लिए तैयार हैं।