
सोमवार को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को पेश किया। यह विधेयक दोपहर प्रश्नकाल के बाद चर्चा के लिए सदन में प्रस्तुत किया गया। स्पीकर ओम बिरला ने विधेयक पर चर्चा के लिए आठ घंटे का समय निर्धारित किया है, जिसमें से एनडीए को 4 घंटे 40 मिनट का समय दिया गया है, जबकि शेष समय विपक्ष के लिए तय किया गया है।
टीडीपी और जेडीयू का समर्थन, विपक्ष का विरोध
इस विधेयक को लेकर तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने समर्थन देने की घोषणा की है। दोनों दलों ने अपने सांसदों को सदन में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है। इसके बावजूद, विपक्ष विधेयक के खिलाफ खड़ा है और इसे लेकर संसद में विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना रहा है। तमिलनाडु की एआईएडीएमके, नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (बीजेडी), और के चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) जैसी तटस्थ पार्टियां भी विपक्ष के साथ खड़ी हैं।
विपक्ष ने विधेयक पर चर्चा का समय बढ़ाकर 12 घंटे करने की मांग की है, जिस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि अगर आवश्यकता पड़ी तो चर्चा का समय बढ़ाया जा सकता है। उनका यह भी कहना था कि यह मुद्दा देश के लिए महत्वपूर्ण है और सभी पार्टियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
एआईएमपीएलबी ने विधेयक को अदालत में चुनौती देने की धमकी दी
मुसलमानों की प्रमुख प्रतिनिधि संस्था, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने इस विधेयक को अदालत में चुनौती देने का ऐलान किया है। एआईएमपीएलबी के सदस्य मोहम्मद अदीब ने विधेयक को “काला कानून” करार दिया और आरोप लगाया कि यह मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों को जब्त करने का प्रयास है। उनका कहना है कि यह विधेयक मुस्लिमों के धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
निष्कर्ष
वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पर संसद में तीव्र बहस की संभावना है, क्योंकि विपक्ष और मुसलमान संगठनों के विरोध के बावजूद कुछ क्षेत्रीय दलों ने इसे समर्थन देने का निर्णय लिया है। अब यह देखना होगा कि विधेयक पर संसद में क्या निर्णय लिया जाता है और इसकी कानूनी स्थिति क्या होती है।