
रायपुर। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक को पारित होने पर बधाई दी और कहा कि यह नया कानून गरीब मुस्लिमों के हितों का संरक्षण करेगा, साथ ही आदिवासियों, सरकारी जमीनों और सर्व समाज की जमीनों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि यह बिल हर समाज के साथ न्याय करने वाला है, और यह कट्टरपंथी वोटबैंक की राजनीति करने वालों के लिए नहीं है। मोदी जी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार करने की दिशा में यह कदम उठाया है, ताकि इन संपत्तियों का सही तरीके से उपयोग हो सके और उनका दुरुपयोग रोका जा सके।
वक्फ संशोधन बिल में किए गए महत्वपूर्ण बदलाव
साव ने वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक में किए गए महत्वपूर्ण सुधारों की चर्चा करते हुए कहा:
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वक्फ परिषद में महिलाओं की भागीदारी: अब वक्फ बोर्ड की परिषद में दो मुस्लिम महिलाओं को शामिल करना अनिवार्य होगा।
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वक्फ संपत्ति पर दावा (सेक्शन 40): अब वक्फ बोर्ड को किसी भी संपत्ति पर दावा करने से पहले उस संपत्ति के सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
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सरकारी संपत्ति का सुरक्षा: अब सरकारी संपत्ति वक्फ से बाहर होगी और वक्फ बोर्ड को सरकारी संपत्ति पर दावा करने का अधिकार नहीं होगा।
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न्यायिक अपील का अधिकार: वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले को अब 90 दिनों के भीतर न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
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वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन: वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन अब जिला मुख्यालय में किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता आएगी।
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समाज के विभिन्न समुदायों के लिए अलग प्रावधान: बोहरा और आगाखानी मुसलमानों के लिए अलग वक्फ बोर्ड बनाए जाएंगे।
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वक्फ बोर्ड के सदस्य: अब वक्फ बोर्ड में शिया, सुन्नी और अन्य मुस्लिम समुदायों के सदस्यों की भागीदारी होगी।
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सेंट्रल वक्फ काउंसिल में सांसदों की संख्या: अब सेंट्रल वक्फ काउंसिल में तीन सांसद होंगे, और यह अनिवार्य नहीं होगा कि सभी सांसद मुस्लिम हों।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि वक्फ बोर्ड की कुल संपत्ति 1.2 लाख करोड़ रुपये मूल्य की है, और इसके पास 9.4 लाख एकड़ जमीन है, जो देश के आदिवासियों के हित में संरक्षित रहेगी।
आदिवासियों और अन्य समुदायों की सुरक्षा
साव ने यह भी स्पष्ट किया कि शेड्यूल 5 और शेड्यूल 6 में वक्फ संपत्ति का निर्माण नहीं किया जा सकेगा, जिससे आदिवासियों के हितों की रक्षा की जाएगी।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बिल समाज के विकास में विश्वास करने वालों के लिए है, और मोदी सरकार ने इस कानून को लागू करके सभी समाजों के साथ न्याय किया है।
