Saturday, March 7, 2026
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बर्खास्त शिक्षकों के समर्थन में उतरे सांसद बृजमोहन अग्रवाल मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, समकक्ष पदों पर समायोजन की रखी मांग

रायपुर।  रायपुर सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने प्रदेश के 2621 बर्खास्त बीएड प्रशिक्षित सहायक शिक्षकों की पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने इन शिक्षकों को ONE TIME EXEMPTION (एक बार छुट) प्रदान करते हुए प्रयोगशाला सहायक/ व्यायाम शिक्षक जैसे समकक्ष पदों पर समायोजित करने की मांग की है।

शिक्षकों के आर्थिक और मानसिक संकट का समाधान जरूरी: अग्रवाल ने अपने पत्र में यह स्पष्ट किया कि वर्ष 2023 में राज्य सरकार द्वारा जारी की गई भर्ती प्रक्रिया के तहत तकनीकी कारणों से नियुक्त सहायक शिक्षकों को 16 माह की सेवा के बाद बर्खास्त कर दिया गया था। यह निर्णय इन शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए गंभीर आर्थिक और मानसिक संकट का कारण बना है। उन्होंने उल्लेख किया कि अधिकतर शिक्षक मध्यम वर्गीय और बीपीएल परिवारों से आते हैं और अब बेरोजगारी के कारण उनके समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

समाज के लिए योगदान देने वाले शिक्षक अब संकट में: सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि ये शिक्षक राज्य की शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन चुके थे और अब उन्हें मानसिक, आर्थिक और सामाजिक पीड़ा से गुजरना पड़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि राज्य सरकार संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए इन शिक्षकों को समकक्ष पदों पर एक बार की विशेष छूट (ONE TIME EXEMPTION) प्रदान कर समायोजित करे।

रिक्त पदों पर समायोजन का प्रस्ताव: अग्रवाल ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि राज्य के मिडिल और हाई स्कूलों में प्रयोगशाला सहायक जैसे कई समकक्ष पद रिक्त हैं, जिन पर इन योग्यताधारी बर्खास्त शिक्षकों को समायोजित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुरूप जीवन रक्षा के अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए इन शिक्षकों के भविष्य को अंधकारमय होने से बचाना चाहिए।

मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील: बृजमोहन अग्रवाल ने अपने पत्र में कहा, “सत्ता में होने का अर्थ केवल शासन करना नहीं, पीड़ितों के आँसू पोंछना भी है। ये शिक्षक केवल रोजगार नहीं, प्रदेश की भविष्य की नींव को संवारने वाले थे। मैं माननीय मुख्यमंत्री जी से निवेदन करता हूँ कि इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर जल्द निर्णय लें।”

आशा की नई किरण: अग्रवाल के इस हस्तक्षेप से बर्खास्त शिक्षकों में आशा की नई किरण जगी है। उनके समर्थन से शिक्षकों को उम्मीद है कि राज्य सरकार इनकी समस्याओं का समाधान शीघ्र और संवेदनशील तरीके से करेगी।

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