
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित कांकेर जिले की इशिका बाला ने अपने हौसले, मेहनत और आत्मविश्वास से एक ऐसी मिसाल कायम की है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा है। 17 वर्षीय इशिका, जो पिछले दो वर्षों से रक्त कैंसर से जूझ रही थीं, ने इस साल 10वीं बोर्ड परीक्षा में 98.17% अंक प्राप्त कर राज्य में शीर्ष स्थान हासिल किया।
कैंसर से संघर्ष और पढ़ाई का जुनून
इशिका को नवंबर 2023 में ब्लड कैंसर (ल्यूकेमिया) का पता चला था। गंभीर इलाज के चलते वह पिछले वर्ष परीक्षा में शामिल नहीं हो सकीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। रायपुर स्थित बाल्को मेडिकल सेंटर में इलाज के दौरान भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। आज उनकी यह मेहनत रंग लाई है।
साधारण परिवार, असाधारण जज़्बा
कांकेर जिले के परालकोट गांव (पीवी-51) निवासी इशिका के पिता शंकर बाला, एक किसान हैं। उन्होंने आर्थिक तंगी के बावजूद अपनी बेटी का इलाज और पढ़ाई दोनों जारी रखने का फैसला किया। शंकर बताते हैं, “इशिका ने आत्मबल और साहस से न सिर्फ बीमारी को हराया बल्कि पूरे परिवार का मान भी बढ़ाया।”
जीवन का लक्ष्य – आईएएस
टॉप करने के बाद इशिका ने कहा, “मैं आगे गणित विषय लेकर इंजीनियरिंग करना चाहती हूं। फिर यूपीएससी की तैयारी कर आईएएस बनना मेरा सपना है।”
बोर्ड परिणाम में संयुक्त टॉप
इशिका के साथ जशपुर जिले के नमन कुमार खुंटिया ने भी 99.17% अंक लाकर 10वीं बोर्ड में संयुक्त रूप से टॉप किया है। दोनों छात्रों ने साबित किया कि कठिनाइयां चाहे जितनी भी हों, यदि इरादा मजबूत हो तो सफलता निश्चित है।
शिक्षा विभाग और पूरे राज्य की ओर से बधाई
इशिका की इस उपलब्धि पर शिक्षा मंडल के अधिकारियों, राज्य सरकार और सामाजिक संगठनों ने उन्हें बधाई दी है। जल्द ही उन्हें राज्य स्तर पर सम्मानित किया जा सकता है।
