
रायपुर। नई दिल्ली के अशोक होटल में आयोजित मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ सरकार के ‘बस्तर मॉडल’ को देशभर के मुख्यमंत्रियों और स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रशंसनीय और अनुकरणीय बताया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा प्रस्तुत बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे नवाचारों ने सांस्कृतिक पुनर्जागरण, जनभागीदारी और विकास के समन्वय का एक नई सोच वाला मॉडल प्रस्तुत किया।
बस्तर ओलंपिक: बंदूक से गेंद की ओर यात्रा
मुख्यमंत्री साय ने अपने प्रस्तुतीकरण में बताया कि बस्तर ओलंपिक अब सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का अभियान बन चुका है। यह आयोजन नक्सल प्रभावित युवाओं को हिंसा की राह से खेलों की दिशा में मोड़ने का प्रभावी माध्यम बना है।
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7 जिलों, 32 विकासखंडों के 1.65 लाख प्रतिभागियों ने लिया भाग
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11 पारंपरिक खेल: तीरंदाजी, खो-खो, कबड्डी, रस्साकशी आदि
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4 श्रेणियाँ: जूनियर, सीनियर, महिला और दिव्यांग
मुख्यमंत्री ने उदाहरण दिया कि दोरनापाल के पुनेन सन्ना, जो कभी नक्सल क्षेत्र से थे, आज व्हीलचेयर दौड़ में पदक विजेता बनकर प्रेरणा का प्रतीक हैं।
बस्तर पंडुम: संस्कृति का महोत्सव, समाज की आत्मा का उत्सव
बस्तर पंडुम के माध्यम से छत्तीसगढ़ ने न केवल आदिवासी लोकसंस्कृति और परंपराओं को संरक्षित किया, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय पहचान भी दी।
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1,743 सांस्कृतिक दल, 47,000 प्रतिभागी, 1,885 ग्राम पंचायतें
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लोकनृत्य, हाट-बाजार, गीत-संगीत, पकवान प्रतियोगिताएं
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2.4 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि का वितरण
इस आयोजन ने सामाजिक समरसता, पीढ़ियों के जुड़ाव और सांस्कृतिक आत्मगौरव को पुनर्जीवित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सराहा, अन्य राज्यों को अपनाने की सलाह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में भी बस्तर ओलंपिक की प्रशंसा करते हुए कहा था कि यह केवल एक खेल नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा का उत्सव है। बैठक में यह सुझाव आया कि:“जनभागीदारी और सांस्कृतिक जुड़ाव पर आधारित मॉडल्स को अन्य राज्यों में भी लागू किया जाना चाहिए।”
सुशासन और डिजिटल अभिसरण की मिसाल
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन एवं अभिसरण विभाग’ का गठन किया गया है। ‘अटल मॉनिटरिंग पोर्टल’ जैसे डिजिटल टूल्स से योजनाओं की निगरानी हो रही है, जिससे समस्याओं का समयबद्ध समाधान संभव हो पाया है।
प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन जैसी केंद्र सरकार की योजनाएं छत्तीसगढ़ में ग्रामसभा, जनसंवाद और तकनीक के माध्यम से सफलतापूर्वक लागू की गई हैं।
