
भिलाई दुर्ग। सायबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच छत्तीसगढ़ पुलिस ने म्यूल अकाउंट (किराए पर दिए गए बैंक खातों) से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों से 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने अपने नाम पर बैंक खाते खोलकर दूसरों को किराए पर दिए थे। इन खातों का इस्तेमाल कर लाखों रुपए की ठगी की गई है।
गिरफ्तार आरोपी और मामला
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल हैं:
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प्रशांत विश्वकर्मा
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मोंटू कुमार
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रफीक खान
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समीर वर्मा
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विपिन शुक्ला
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मोहम्मद कलाम
पुलिस ने सभी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
कई बैंकों से ठगी की रकम का लेन-देन
एएसपी सुखनंदन राठौर और पुलिस प्रवक्ता एएसपी पद्मश्री तवर ने प्रेस वार्ता में जानकारी दी कि:
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उत्कर्ष बैंक के दो खातों से ₹29,036 की ठगी हुई। प्रशांत और मोंटू ने यह खाते किराए पर दिए थे।
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पंजाब नेशनल बैंक के खाते से ₹50,000 की ठगी हुई। खाता रफीक खान के नाम पर था।
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बैंक ऑफ इंडिया के खातों से ₹3 लाख की ठगी का पता चला। समीर वर्मा और विपिन शुक्ला ने यह खाते मोहम्मद कलाम को दिए थे, जिसने आगे किसी और को पैसे लेकर सौंप दिए।
बड़े ठग अभी भी फरार
गिरफ्तार आरोपी सिर्फ म्यूल अकाउंट धारक हैं — यानी जिनके नाम पर खाते हैं। असली साइबर ठग, जिन्होंने इन खातों का उपयोग कर राज्यों के बाहर के लोगों से ठगी की, अब तक पकड़ से बाहर हैं।
पुलिस की अपील और चेतावनी
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि:अपने बैंक खाता, डेबिट कार्ड, आधार नंबर या अन्य संवेदनशील जानकारी लालच में आकर किसी को भी किराए पर न दें। ऐसा करना न केवल अपराध है, बल्कि आप खुद सायबर ठगी का हिस्सा बन सकते हैं।”
बैंकों की भूमिका भी सवालों के घेरे में
पुलिस का कहना है कि बैंक लगातार म्यूल अकाउंट खोलने में लापरवाही बरत रहे हैं। संदेहास्पद ट्रांजेक्शन के बावजूद बैंक प्रबंधन सतर्क नहीं दिख रहा। कई खातों में लाखों की अवैध लेन-देन के बावजूद कोई अलर्ट नहीं जारी किया गया।
