Sunday, March 8, 2026
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दुर्ग जिले में शिक्षकों की असंतुलित पोस्टिंग से प्रभावित हो रहा ग्रामीण अंचलों का परीक्षा परिणाम : जिला शिक्षा अधिकारी ने जताई चिंता

रायपुर दुर्ग। दुर्ग जिले के ग्रामीण अंचलों में शिक्षकों की भारी कमी और शहरी क्षेत्रों में उनकी अधिकता के चलते शैक्षिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यह खुलासा जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग को भेजी गई रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस असंतुलन के चलते ग्रामीण स्कूलों का परीक्षा परिणाम औसत से भी नीचे चला गया है।

जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि शैक्षणिक असंतुलन को दूर करने और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए युक्तियुक्तकरण (Rationalization) आवश्यक है, ताकि शिक्षकों की पदस्थापना आवश्यकता के अनुसार हो सके।

ग्रामीण अंचलों में शिक्षकों की भारी कमी

रिपोर्ट में विकासखंड धमधा के शासकीय हाई स्कूल मुरमुदा का उदाहरण देते हुए बताया गया कि वहाँ स्वीकृत 6 पदों के विरुद्ध केवल 3 व्याख्याता कार्यरत हैं, जबकि कक्षा दसवीं के 63 छात्र पंजीकृत हैं। इस स्कूल का वार्षिक परीक्षा परिणाम मात्र 47.62% रहा।

इसी प्रकार:

  • शासकीय हाई स्कूल सिलितरा में 81 छात्र पंजीकृत हैं लेकिन कोई भी व्याख्याता पदस्थ नहीं है। परिणाम केवल 36.59% रहा।

  • शासकीय हाई स्कूल बिरेझर में 63 छात्र, शून्य व्याख्याता, और परिणाम 35.00% रहा।

जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि शिक्षक नहीं होने से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही, जिससे परीक्षा परिणाम पर सीधा असर पड़ रहा है।

शहरी स्कूलों में शिक्षकों की अधिकता

इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में छात्रों की तुलना में शिक्षक आवश्यकता से अधिक हैं:

  • शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला केम्प-1 मिलाई में 225 छात्रों के लिए स्वीकृत 7 पदों के विरुद्ध 17 शिक्षक कार्यरत हैं – यानी 10 शिक्षक अतिरिक्त।

  • नेहरू शासकीय प्राथमिक शाला दुर्ग में 113 छात्रों के लिए स्वीकृत 4 पदों के बजाय 11 शिक्षक पदस्थ हैं – यानी 7 शिक्षक अतिरिक्त।

यह स्पष्ट करता है कि जहाँ जरूरत है, वहाँ शिक्षक नहीं हैं, और जहाँ अपेक्षा से कम छात्र हैं, वहाँ शिक्षक अधिक संख्या में हैं।

रिपोर्ट में युक्तियुक्तकरण की सिफारिश

जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग ने ग्रामीण अंचलों में शिक्षकों की शीघ्र एवं आवश्यकतानुसार पदस्थापना की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि इससे परीक्षा परिणामों में सुधार आएगा और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण एवं समुचित शिक्षा मिल सकेगी।

विभाग से अपेक्षा है कि वह इस रिपोर्ट के आलोक में शिक्षकों का समुचित पुनर्विन्यास करे और शिक्षा व्यवस्था को संतुलित बनाए।

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