
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शासकीय कार्यालयों में शनिवार की साप्ताहिक छुट्टी समाप्त करने की संभावित तैयारी को लेकर राज्य में सियासत गरमा गई है। इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सरकार को घेरते हुए इसे “तानाशाही फैसला” और “मानवाधिकारों का उल्लंघन” करार दिया है।
कांग्रेस के प्रवक्ता अजय गंगवानी ने आज एक प्रेस बयान में कहा कि बिना किसी पूर्व चर्चा या कर्मचारी संगठनों से राय लिए सांय सरकार यह निर्णय थोपने जा रही है, जो कर्मचारियों के साथ सरासर अन्याय है। उन्होंने इसे “भाजपा का कर्मचारी विरोधी चरित्र” करार दिया।
GAD ने भेजी रिपोर्ट, पुलिस विभाग में पहले ही लागू
गंगवानी ने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सरकार को एक रिपोर्ट सौंप दी है जिसमें सुझाव दिया गया है कि सरकारी कर्मचारियों को शनिवार को भी कार्य करना चाहिए। यह आदेश पुलिस विभाग और मंत्रालयों में पहले ही लागू हो चुका है और अब इसे अन्य विभागों में भी लागू करने की तैयारी है।
केंद्रीय कर्मचारियों को दो दिन अवकाश, फिर दोहरा मापदंड क्यों?
गंगवानी ने सवाल उठाया, “जब केंद्र सरकार के कर्मचारी शनिवार और रविवार को अवकाश पाते हैं और भाजपा शासित कई राज्यों में यह व्यवस्था लागू है, तो छत्तीसगढ़ में यह दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है?” उन्होंने इस निर्णय को राज्य के कर्मचारियों के साथ भेदभाव और सौतेला व्यवहार बताया।
पुलिसकर्मियों की मानसिक स्थिति पर असर, आत्महत्या की घटनाओं का हवाला
उन्होंने पुलिस विभाग का हवाला देते हुए कहा कि “पुलिसकर्मी पहले ही भारी मानसिक दबाव में काम करते हैं। हमने ऐसे कई मामले देखे हैं जहाँ मानसिक तनाव के कारण आत्महत्याएँ और हिंसक घटनाएँ हुई हैं। ऐसे में शनिवार की छुट्टी समाप्त करना न केवल अन्याय है, बल्कि यह सामाजिक न्याय के भी विरुद्ध है।”
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की 5-दिवसीय कार्य प्रणाली को पलटने की कोशिश
कांग्रेस प्रवक्ता ने याद दिलाया कि भूपेश बघेल सरकार ने कर्मचारियों की कार्य क्षमता और मानसिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए 5-दिवसीय कार्य प्रणाली लागू की थी, जिसे कर्मचारी संगठनों ने भी सराहा था। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार इस निर्णय को बदलकर केवल पूर्व सरकार के अच्छे कामों को मिटाने की साजिश कर रही है।
“पूर्ववर्ती सरकार की योजनाओं को बदला जा रहा है दुर्भावनापूर्वक”
गंगवानी ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि “राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के चलते भाजपा सरकार जनहितकारी योजनाओं को बंद कर रही है – चाहे वह बिजली बिल हाफ योजना हो, बेरोजगारी भत्ता, स्वामी आत्मानंद स्कूल योजना या राजीव गांधी भूमिहीन कृषक मजदूर न्याय योजना।”
कांग्रेस की मांग: निर्णय तत्काल वापस लिया जाए
अंत में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस पार्टी इस निर्णय का विरोध करती है और सरकार से मांग करती है कि यह कर्मचारी विरोधी और अलोकतांत्रिक फैसला तुरंत वापस लिया जाए।
