Sunday, March 8, 2026
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रायपुर में ज़मीन धोखाधड़ी का बड़ा मामला, महालेखाकार कार्यालय के कर्मचारी सौरभ बोस पर गंभीर आरोप

रायपुर। राजधानी रायपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां महालेखाकार कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी सौरभ बोस पर जमीन धोखाधड़ी का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले की शिकायत राजधानी के विधानसभा थाना में दर्ज कराई गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिलासपुर निवासी शाहबाज हुसैन उर्फ शिबू फरीदी द्वारा एक ज़मीन में प्लॉटिंग कर उसे विभिन्न लोगों को बेचा गया था। लेकिन कुछ समय पश्चात उस ज़मीन पर विवाद उत्पन्न हो गया और किसी अन्य व्यक्ति ने मौके पर जेसीबी चलवाकर ज़मीन को घेर लिया और वहां अपना बोर्ड लगा दिया। इससे ज़मीन खरीदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

स्थिति को सुलझाने के प्रयास में, शाहबाज हुसैन ने सौरभ बोस के नाम पर पावर ऑफ अटॉर्नी जारी की, ताकि वह ज़मीन विवाद का समाधान कर सभी प्लॉट खरीदारों को न्याय दिला सके। बताया जा रहा है कि इस प्रक्रिया में 13 लाख रुपए की राशि नकद और ऑनलाइन माध्यम से सौरभ बोस को दी गई थी, ताकि वह विवादित ज़मीन को बेचकर सभी हितधारकों को अनुपात में राशि लौटाए।

आरोप: अपने चहेतों को ज़मीन बांटी, खरीदारों को किया दरकिनार

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सौरभ बोस ने थाने परिसर में हुई सर्वसम्मति की बैठक में लिए गए फैसले के विपरीत कार्य किया और ज़मीन को अपने नजदीकी परिचितों को दे दिया, वहाँ डीपीसी करवाकर बोर्ड भी लगवा दिए गए। इतना ही नहीं, 13 लाख रुपए की राशि भी आरोपियों ने आपस में बांट ली।

इस धोखाधड़ी से पीड़ित ज़मीन खरीदार लगातार न्याय के लिए थानों के चक्कर लगा रहे हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि सौरभ बोस और उनके साथियों ने ब्रोकर नकुल नायक से बलपूर्वक पीडीसी चेक भी लिया, जिसे आज तक लौटाया नहीं गया है।

प्रशासन से पारदर्शिता की मांग

प्रदेश सरकार एक ओर ज़मीन खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता की बात करती है, वहीं दूसरी ओर सरकारी कर्मचारी द्वारा इस प्रकार की धोखाधड़ी से शासन की नीतियों पर भी सवाल उठने लगे हैं। पीड़ितों ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि सरकारी पद पर कार्यरत व्यक्ति द्वारा किया गया विश्वासघात अधिक गंभीर है।

फिलहाल मामला विधानसभा थाने में दर्ज है और जांच जारी है। पीड़ितों को न्याय कब मिलेगा, यह आने वाला समय बताएगा, लेकिन यह मामला निश्चित ही प्रदेश में ज़मीन की खरीद-फरोख्त में फैले भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की ओर संकेत करता है।

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