
महासमुंद। छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले ही डीएपी खाद का अभूतपूर्व संकट गहराता जा रहा है। इस विषय पर पूर्व संसदीय सचिव एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह संकट सरकार की सोची-समझी साजिश है, जिससे किसानों को धान की बुवाई से हतोत्साहित कर उनकी पैदावार को प्रभावित किया जा सके।
चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश में मानसून के दस्तक देने से पहले ही किसान बुवाई की तैयारी में जुटे हैं। कहीं खेतों की मिट्टी पलटी जा रही है, तो कहीं नर्सरी तैयार हो चुकी है। ऐसे समय में किसानों को डीएपी खाद की अत्यधिक आवश्यकता है, लेकिन सहकारी समितियों में डीएपी उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में किसान खुले बाजार से महंगे दामों में डीएपी खरीदने को विवश हैं।
“20:20:15 खाद थोपने का दबाव”
उन्होंने बताया कि पटेवा, झलप सहित कई क्षेत्रों की समितियों में डीएपी की भारी किल्लत है और किसानों को इसके विकल्प के तौर पर 20:20:15 नामक खाद लेने का दबाव बनाया जा रहा है। चंद्राकर ने चेताया कि यह खाद धान के लिए उतनी प्रभावी नहीं है जितनी डीएपी, जिससे धान की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
सरकार पर बड़े व्यापारियों को फायदा पहुंचाने का आरोप
चंद्राकर ने कहा, “भाजपा की डबल इंजन सरकार, किसानों के लिए ट्रबल इंजन साबित हो रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सहकारी समितियों में पंजीकृत किसानों के अनुसार खाद-बीज का भंडारण नहीं किया गया है। डीएपी पहले से ही बड़े व्यापारियों के पास डंप है, और किसान अतिरिक्त पैसा खर्च कर मजबूरी में उनसे खरीदने को बाध्य हैं।
उन्होंने कहा कि प्री-मानसूनी बारिश के चलते खेत तैयार हो चुके हैं, लेकिन सरकार ने खाद-बीज की समुचित व्यवस्था नहीं की। किसान आज डीएपी, यूरिया, बीज की कमी से परेशान हैं। हालात यह हैं कि बोनी और थरहा की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
“छत्तीसगढ़ बन गया है नकली खाद और बीज का अड्डा”
पूर्व विधायक चंद्राकर ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के संरक्षण में प्रदेश नकली बीज, नकली दवाओं और घटिया नैनो यूरिया का अड्डा बन गया है। सरकार की मशीनरी को बड़े उद्योगपतियों के हित में लगाया जा रहा है, जबकि किसानों की जरूरतों को जान-बूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत इस संकट का समाधान करे, समितियों में खाद-बीज की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करे, और नकली खाद-बीज के कारोबार पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि किसानों का भरोसा कायम रह सके।
