
जगदलपुर। मानसून के दस्तक देते ही बस्तर संभाग में मौसमी बीमारियों का खतरा फिर गहराने लगा है। खासकर जापानी इंसेफेलाइटिस (Japanese Encephalitis – JE) के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 से अब तक बस्तर संभाग में कुल 19 मरीजों की पुष्टि हुई है, जिनमें से 2 मरीजों की मौत हो चुकी है।
जिलेवार स्थिति:
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बस्तर जिले से 13 मामले
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बीजापुर से 3 मामले
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अन्य जिलों से 3 मामले
मृतकों में लोहांडीगुड़ा और केसलूर इलाके के मरीज शामिल हैं। हालांकि इन मौतों की पुष्टि के लिए अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
क्या है जापानी बुखार (JE)?
यह एक वायरल बीमारी है जो कुलेक्स मच्छरों के काटने से फैलती है। ये मच्छर अधिकतर धान के खेतों और जंगलों में पनपते हैं।
बच्चों पर इसका असर सबसे ज्यादा होता है।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुरूप साहू के अनुसार:बच्चों में JE का असर गंभीर हो सकता है। इससे बचाव के लिए मच्छरों से सुरक्षा जरूरी है जैसे – मच्छरदानी का प्रयोग, साफ-सफाई, और मच्छरनाशक दवाओं का छिड़काव।
डिमरापाल मेडिकल कॉलेज, जगदलपुर में JE की जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध है।
स्वास्थ्य विभाग की तैयारी:
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संभावित क्षेत्रों में एहतियाती दवाओं का छिड़काव
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सामुदायिक जागरूकता अभियान
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लक्षण दिखने पर त्वरित जांच और इलाज की व्यवस्था
पिछले वर्षों का अनुभव:
बस्तर में JE की समस्या नई नहीं है। बीते वर्षों में भी बरसात के मौसम में इसकी सक्रियता देखी गई है। पिछली बार भी कई बच्चों को इसकी चपेट में आना पड़ा था। इस बार चिंता इस बात की है कि मरीजों की संख्या के साथ-साथ मौतों का आंकड़ा भी जुड़ गया है।
सावधानी ही बचाव:
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मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करें
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घर और आस-पास पानी जमा न होने दें
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बच्चों में बुखार, उलझन, कमजोरी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल पहुंचें
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें
