Sunday, March 8, 2026
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सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद में नीली अर्थव्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल, विधायी ढांचे की मांग की

रायपुर। रायपुर से लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद में नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) को लेकर केंद्र सरकार से कड़े सवाल पूछते हुए उसके विधायी ढांचे, पर्यावरणीय संरक्षण, नियामक खामियों और विभागीय ओवरलैप्स पर स्पष्टीकरण मांगा।

अग्रवाल ने पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से अतारांकित प्रश्न के माध्यम से जानकारी ली और जानना चाहा:
जब तक नीली अर्थव्यवस्था के लिए कोई विशिष्ट कानून मौजूद नहीं है, तब तक पर्यावरणीय और नियामक चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार के पास कौन-सा प्रभावी तंत्र है? ❞
❝ क्या सरकार इस दिशा में कोई ठोस विधायी ढांचा तैयार कर रही है या प्रस्तावित है?

केंद्र सरकार का जवाब:

राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने फरवरी 2021 में नीली अर्थव्यवस्था के लिए एक समग्र नीति मसौदा सार्वजनिक किया था, जिसे जुलाई 2022 में संशोधित किया गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार ने समुद्री संसाधनों की सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित कानूनों और नीतियों को लागू किया है:

 मौजूदा विधायी और नीतिगत ढांचे:

  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986

  • सीआरजेड अधिसूचना, 2019

  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972

  • राज्य स्तरीय मरीन फिशिंग रेगुलेशन एक्ट्स

  • राष्ट्रीय समुद्री मत्स्य नीति, 2017

  • मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 1958

  • मेजर पोर्ट अथॉरिटी एक्ट, 2021

  • मैरिटाइम जोन्स ऑफ इंडिया एक्ट, 1976

  • रीसाइक्लिंग ऑफ शिप्स एक्ट, 2019

  • इनलैंड वेसल्स एक्ट, 2021

नीली अर्थव्यवस्था नीति का उद्देश्य:

राज्यमंत्री ने कहा कि इस नीति का मकसद है:

  • समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग

  • तटीय समुदायों के जीवन में सुधार

  • समुद्री जैव विविधता का संरक्षण

  • राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को प्राथमिकता

  • भारत की जीडीपी में योगदान बढ़ाना

  • समुद्र आधारित उद्योगों को विकसित करना

यह नीति ‘विजन न्यू इंडिया 2030’ के अनुरूप है, जिसमें ब्लू इकोनॉमी अकाउंटिंग फ्रेमवर्क, ओशन गवर्नेंस, समुद्री पर्यटन, मत्स्य पालन, और प्रसंस्करण इकाइयों जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल की टिप्पणी:
भारत जैसे समुद्र तटीय देश के लिए नीली अर्थव्यवस्था भविष्य के विकास का एक बड़ा माध्यम है। यह तटीय राज्यों की अर्थव्यवस्था को नई गति देने के साथ-साथ राष्ट्रीय जीडीपी में भी अहम भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस नीति को जल्द कानूनी रूप देकर लागू किया जाए, जिससे भारत वैश्विक समुद्री अर्थव्यवस्था में एक अग्रणी देश के रूप में उभर सके।

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