
राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के सदस्य अमर पारवानी ने बोर्ड की एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में जोर देकर कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में कुल 1 प्रतिशत (100 बेसिस प्वाइंट) की कटौती कर व्यापार एवं उद्योग को राहत देने की पहल की गई है, लेकिन इसका समुचित लाभ ज़मीनी स्तर पर अब तक नहीं पहुँच पाया है।
उन्होंने बताया कि कैश रिज़र्व रेश्यो (CRR) में 1% की कटौती से लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये की तरलता बैंकिंग प्रणाली में आई है। यह राशि बैंकों के पास अतिरिक्त फंड के रूप में उपलब्ध है, जिसका प्रत्यक्ष लाभ व्यापार और उद्योग वर्ग को मिलना चाहिए।
अमर पारवानी ने कहा कि 7 फरवरी, 9 अप्रैल और 6 जून 2025 को रेपो रेट में क्रमशः कटौती की गई, जिससे व्यापारिक ऋण सस्ता होना चाहिए था, लेकिन राज्य के अधिकांश बैंकों ने अभी तक इस राहत को उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँचाया है। इससे व्यापारी वर्ग को ऊंची ब्याज दरों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने इस विषय पर बोर्ड की बैठक में चिंता जताई और बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के लिए निगरानी तंत्र स्थापित करने की मांग की, ताकि आरबीआई की दर कटौती का लाभ त्वरित और पारदर्शी रूप से उद्योग और व्यापार वर्ग को मिल सके।
अमर पारवानी ने यह भी बताया कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी बैंकों को निर्देशित किया था कि वे यह लाभ ज़रूर पहुंचाएँ, लेकिन अब तक धरातल पर इसका असर स्पष्ट नहीं दिख रहा है।
उन्होंने कहा कि ब्याज दरों में त्वरित राहत से न केवल व्यापार और उद्योग जगत को सहारा मिलेगा, बल्कि इससे राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर GDP में वृद्धि, व्यापार विस्तार और रोजगार सृजन की गति को भी बल मिलेगा।
