Wednesday, April 8, 2026
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देश के सबसे बड़े पोल्ट्री कॉन्क्लेव का आज रायपुर में हुआ आगाज, आई.बी. ग्रुप ने पेश की नई पहल

रायपुर। आज प्रेस क्लब रायपुर में आई.बी. ग्रुप के एमडी बहादुर अली ने देश के सबसे बड़े पोल्ट्री कॉन्क्लेव के बारे में मीडिया से संवाद किया। इस दौरान कंपनी की डायरेक्टर जोया आफरीन आलम और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। इस अवसर पर अली ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमने इस पोल्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन खासतौर पर गाँव के विकास को ध्यान में रखते हुए किया है। इसमें देशभर से पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े ट्रेडर्स और फार्मर्स शामिल हो रहे हैं। आई.बी. ग्रुप अपने सहयोगियों और कर्मचारियों के कारण इतना बड़ा बना है, और उनका विकास हमारे लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम 2035 तक भारत को एक विकसित पोल्ट्री राष्ट्र बनाने की दिशा में योगदान देने का संकल्प लेते हैं। इसके साथ ही हम देश में प्रोटीन की कमी को समाप्त करने के लिए काम करेंगे, ताकि प्रत्येक नागरिक स्वस्थ हो। इसके अलावा, रोजगार कार्यक्रमों के जरिए हर घर को समृद्ध बनाने का लक्ष्य है।”

गांव के सरपंचों से आई फार्म स्थापित करने का प्रस्ताव

अली ने यह भी बताया कि 10 गाँव के सरपंचों ने उनसे संपर्क किया है और कहा है कि आई.बी. ग्रुप उनके गाँवों में पोल्ट्री फार्म स्थापित करे, क्योंकि इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और गाँव का समग्र विकास होगा। इस प्रकार, पोल्ट्री फार्म लगाने से रोजगार बढ़ेगा, पलायन रुक जाएगा और स्थानीय बाजारों का भी विकास होगा।

आई.बी. ग्रुप की विशेष पहल – ग्रामीण प्रशिक्षण

आई.बी. ग्रुप पोल्ट्री फार्मर्स को प्रशिक्षित कर उनके व्यवसाय को बढ़ावा दे रही है, जो पूरे देश में एक अनोखी पहल है। अली ने यह भी कहा कि उनकी कंपनी फार्मर्स के साथ उनके परिवार का भी विकास कर रही है, जबकि अन्य कंपनियाँ केवल व्यापार करती हैं।

आई.बी. ग्रुप की पोल्ट्री व्यवसाय में बढ़ती भागीदारी

वर्तमान में, आई.बी. ग्रुप की पोल्ट्री व्यवसाय में 20% की भागीदारी हो गई है, और भविष्य में इसे बढ़ाकर 50% तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

मक्का की खेती में भविष्य का उज्जवल मार्ग

अली ने छत्तीसगढ़ के कृषि भविष्य के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, “वर्तमान में छत्तीसगढ़ के किसान धान की खेती करते हैं, लेकिन आने वाले वर्षों में मक्के की खेती का रुझान बढ़ेगा। धान की खेती में ज्यादा लागत और पानी लगता है, जबकि मक्का एक अधिक सुरक्षित और नगद फसल साबित हो सकती है। अगले 10 वर्षों में मक्का पूरे छत्तीसगढ़ में एक प्रमुख फसल के रूप में स्थापित हो सकता है।”

आई.बी. ग्रुप का एक और महत्वपूर्ण कदम – प्रोटीन हब बनाना

अली ने छत्तीसगढ़ को देश का पहला प्रोटीन हब बनाने के उद्देश्य से आई.बी. ग्रुप के प्रयासों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कंपनी सोया चंक्स के उत्पादन के माध्यम से प्रोटीन की आपूर्ति बढ़ाने का कार्य कर रही है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और छत्तीसगढ़ को प्रोटीन हब के रूप में पहचान मिलेगी।

दो दिवसीय पोल्ट्री कॉन्क्लेव की शुरुआत

आई.बी. ग्रुप के इस पोल्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन रायपुर के होटल ओमाया में हो रहा है, जहां देशभर से पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े लोग एकत्रित हो रहे हैं। अली ने मीडिया से अपील की कि वे इस आयोजन को कवर कर छत्तीसगढ़ को देश का पहला प्रोटीन हब बनाने में योगदान दें।

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