रायपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर 30 यात्री ट्रेनों को 16 दिनों के लिए रद्द कर दिए जाने को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने केन्द्र की मोदी सरकार और रेलवे मंत्रालय पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह फैसला आम जनता के साथ अन्याय है और इसका सीधा लाभ उद्योगपति अडानी को पहुंचाया जा रहा है।
विकास उपाध्याय ने आरोप लगाया कि “रेल विभाग का यह अडानी प्रेम अब छत्तीसगढ़ की जनता के लिए मुसीबत बन चुका है। लगातार हिन्दुओं के महत्वपूर्ण त्यौहारों के दौरान ट्रेनों को रद्द किया जा रहा है, जबकि मालगाड़ियों को प्राथमिकता दी जा रही है। यात्री ट्रेनों को स्टेशनों पर रोककर अडानी की मालगाड़ियों को रास्ता दिया जा रहा है।”
उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब इस प्रकार की ट्रेन रद्दीकरण की घटनाएं हुई हैं। “मोदी सरकार आने के बाद से आम जनता की सुविधाओं की अनदेखी कर उद्योगपतियों को फायदा पहुँचाने का ही काम हो रहा है,” उपाध्याय ने आरोप लगाया।
रेलवे किराया बढ़ा, सुविधाएं घटीं
पूर्व विधायक ने यह भी बताया कि 1 जुलाई से रेलवे द्वारा टिकट दरों में बढ़ोतरी की गई है, जबकि सुविधाओं में लगातार गिरावट आई है। उन्होंने कहा, “एक ओर किराया बढ़ाया जा रहा है, दूसरी ओर ट्रेनें रद्द कर आम यात्रियों की परेशानियाँ बढ़ाई जा रही हैं।”
भाजपा के जनप्रतिनिधियों पर भी साधा निशाना
विकास उपाध्याय ने छत्तीसगढ़ के भाजपा सांसदों, मंत्रियों और विधायकों पर भी चुप्पी साधने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ में डबल इंजन नहीं, अब ट्रिपल इंजन सरकार भी फेल हो चुकी है। भाजपा के सभी जनप्रतिनिधि आम जनता की आवाज बनने की बजाय उद्योगपतियों के हित में मौन बैठे हैं।”
विकास उपाध्याय का सवाल – “हिंदुओं के त्योहारों पर ही क्यों ट्रेनों की बलि?”
पूर्व विधायक ने यह सवाल भी उठाया कि आखिर हिंदुओं के त्योहारों के दौरान ही ट्रेनें क्यों रद्द की जाती हैं? क्या यह केवल एक संयोग है या इसके पीछे कोई रणनीति? उन्होंने कहा, “भाजपा केवल वोट लेने के लिए हिंदू हित की बात करती है, लेकिन जब सुविधाएं देने की बात आती है, तो उद्योगपतियों की सेवा में लग जाती है।”
“अब नहीं चलेगी मोदी की मनमानी”
विकास उपाध्याय ने कहा कि जनता अब सब समझ चुकी है और मोदी सरकार को जल्द ही इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने छत्तीसगढ़वासियों से अपील की कि वे इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं और इस दोहरे रवैये का पुरजोर विरोध करें।
