रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने डिजिटल अरेस्ट का मुद्दा गत दिसम्बर में लोकसभा में उठाया था
नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने देश में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए सोमवार को कहा कि ऐसे घोटालों में बैंक अधिकारी भी आरोपियों के साथ मिले हुए पाए गए हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि खासकर वरिष्ठ नागरिक इसकी चपेट में आ रहे हैं। एक रिटायर्ड दंपति का उदाहरण देते हुए कोर्ट ने बताया कि उनकी पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी ठगों ने छीन ली। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने केंद्र सरकार की ओर से स्टेटस रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि डिजिटल अरेस्ट से निपटने के लिए अब काफी व्यापक एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार की गई है। कोर्ट ने इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जरूरी निर्देश जारी करने की बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई की एसओपी का जिक्र किया, जिसमें साइबर फ्रॉड की आशंका होने पर बैंकों द्वारा अस्थायी डेबिट होल्ड लगाने जैसी त्वरित कार्रवाई का प्रावधान है। कोर्ट ने गृह मंत्रालय से कहा कि 2 जनवरी 2026 की एसओपी को पूरे देश में लागू किया जाए और इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही इन नियमों को दो हफ्तों के अंदर नोटिफाई करने का आदेश भी
दिया।
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद में उठाया था मामला
लोकसभा में गत दिसम्बर में शून्य काल के दौरान रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने डिजिटल अरेस्ट फाइनेंशियल फ्रॉड में तेजी से ही रही बढ़ोतरी को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। नागरिकों की फाइनेंशियल सिक्योरिटी, खासकर बुजुर्गों की फाइनेंशियल सिक्योरिटी को हो रहे नुकसान का हवाला देते हुए सांसद अग्रवाल ने औपचारिक रूप से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भारतीय बैंकिंग सिस्टम में एआई-आधारित सेफ्टी होल्ड गाइडलाइंस और एस्को मैकेनिज्म लागू करने का अनुरोध किया।
सांसद अग्रवाल की इस पहल के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई के एसओपी को पूरे देश में लागू करने का निर्देश जारी किया है।
