Monday, April 13, 2026
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गौरेला पेंड्रा मरवाही : शहीद वीर नारायण सिंह ने आदिवासी समाज के उत्थान के लिए उल्लेखनीय कार्य किया : विधायक डॉ. के.के. ध्रुव

शहीद वीर नारायण सिंह की स्मृति में आयोजित 5 दिवसीय कार्यक्रम संभाग स्तरीय आदिवासी लोक कला महोत्सव के साथ सम्पन्न

 

छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह की स्मृति में आयोजित 5 दिवसीय कार्यक्रम आज संभाग स्तरीय आदिवासी लोककला महोत्सव के साथ सम्पन्न हुआ। जिला प्रशासन के सहयोग से सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग द्वारा जिम्नास्टिक हॉल गुरूकुल पेंड्रारोड में आयोजित समापन समारोह के मुख्य अतिथि विधायक डॉ. के.के. ध्रुव थे। डॉ. ध्रुव और विशिष्ट अतिथियों ने छत्तीसगढ़ महतारी और शहीद वीर नारायण सिंह की छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर राजगीत के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्य अतिथि ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी समाज के उत्थान के लिए उल्लेखनीय कार्य किए है। उन्होंने देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया है। हम उनसे प्रेरणा लेते हुए भाईचारे के साथ समाज के विकास के लिए कार्य करेंगे। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होने संभाग स्तरीय आदिवासी लोक कला महोत्सव में जिलों से आए कलाकारों को बधाई और शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य श्रीमती अर्चना पोर्ते, राज्य युवा आयोग के सदस्य श्री उत्तम वासुदेव, जनपद अध्यक्ष गौरेला सुश्री ममता पैकरा, सरपंच ग्राम पंचायत सेमरा श्रीमती गजमति भानू, सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष श्री दया वाकरे, श्रीमती बुंदकुंवर मास्को, सहाना बेगम, भाऊसिंह बड़करे, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास डॉ. ललित शुक्ला सहित गणमान्य नागरिक एवं लोक कलाकार उपस्थित थे।
शहीद वीर नारायण सिंह के शहादत दिवस 10 दिसंबर को उनके स्मृति में प्रतिवर्ष उनके जीवनी एवं उत्कृष्ट कार्यो से युवा पीढ़ी को अवगत कराने के लिए छात्रावासों-आश्रमों में निबंध, पेंटिग, चित्रकला एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता तथा लोक गीत एवं लोक नृत्य का आयोजन किया जाता है। इसी तरह जिला एवं संभाग स्तर पर आदिवासी लोक कला महोत्सव का आयोजन किया जाता है। बिलासपुर संभाग स्तरीय आदिवासी लोक कला महोत्सव का आयोजन आज जीपीएम जिले में किया गया। कार्यक्रम में जीपीएम, रायगढ़, कोरबा एवं जांजगीर-चांपा जिले के लोक कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर गौरा, शैला, कर्मा, गेड़ी आदि नृत्यों की शानदार प्रस्तुती दी। इसके पूर्व 10 दिसंबर को प्रभात फेरी, 11 दिसंबर को निबंध प्रतियोगिता, 12 दिसंबर को पेंटिंग एवं चित्रकला प्रतियोगिता एवं 13 दिसंबर को वाद-विवाद प्रतियोगता का आयोजन किया गया। कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।

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