रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित एकात्म परिसर में भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा (अजजा मोर्चा) की प्रदेश कार्यसमिति द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 पर कार्यशाला और बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय की मुख्य उपस्थिति रही। उन्होंने विधेयक को आदिवासियों की भूमि और पहचान की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक कदम बताया।
पवन साय ने कहा कि सरल और सहज जीवन जीने वाले आदिवासी समाज को किसी भी प्रकार की अनुचित कानूनी या जमीन संबंधी परेशानी से बचाने के लिए यह विधेयक लाया गया है। उन्होंने विपक्षी दलों पर इस विषय में भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मोर्चा के कार्यकर्ता इस विधेयक के लाभों को आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाएं।
बैठक को संबोधित करते हुए अजजा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष विकास मरकाम ने बताया कि विधेयक में पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों (जो छत्तीसगढ़ के लगभग 65% हिस्से में आते हैं) में वक्फ बोर्ड द्वारा अनुचित दावों को रोकने के लिए कड़े और स्पष्ट प्रावधान जोड़े गए हैं।
विधेयक के मुख्य प्रावधान:
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धारा 3E के तहत, अनुसूचित जनजातियों की जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित करने पर पूर्ण प्रतिबंध।
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पांचवीं व छठवीं अनुसूची क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की संपत्ति को वक्फ घोषित नहीं किया जा सकेगा।
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वक्फ के रूप में दावा की गई संपत्तियों का सत्यापन कलेक्टर द्वारा किया जाएगा।
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वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण अब राज्य के राजस्व कानूनों के अनुसार किया जाएगा।
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धारा 40 को हटाकर, वक्फ बोर्ड की मनमर्जी से संपत्ति वक्फ घोषित करने की शक्ति समाप्त।
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वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसलों के खिलाफ 90 दिनों के भीतर हाईकोर्ट में अपील की सुविधा।
विकास मरकाम ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है।
बैठक में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे, जिनमें श्रीकांत सोमावार, विद्या सिदार, सालिक साय, डॉ. देवेंद्र महला, सुनीति राठिया, सुमित्रा मार्कोले, सत्यनारायण राठिया और नंदलाल मुड़ामी प्रमुख रूप से शामिल रहे।
जय ओमकार भीलाला समाज और आदिवासी सेवा मंडल जैसे संगठनों ने भी विधेयक का खुलकर समर्थन किया, इसे सरकार की आदिवासी हितों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।
