महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बागबाहरा ब्लॉक अंतर्गत गांधी ग्राम तमोरा में वन विभाग और पुलिस प्रशासन ने बुधवार तड़के 4 बजे अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान करीब 52 परिवारों, जिनमें अधिकांश आदिवासी समुदाय से हैं, को वन भूमि से जबरन हटाया गया। कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों और प्रशासन के बीच झड़प की स्थिति भी बनी।
2012 से कर रहे थे खेती
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि वे 2012 से कक्ष क्रमांक 95 व 96 की वन भूमि पर खेती कर रहे थे। उन्होंने जमीन पर खेत, मेड़, फसल की व्यवस्था कर रखी थी, जिसे ध्वस्त कर दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक हटा दिया गया।
महिलाओं से भी हुई सख्ती
इस कार्रवाई में महिला वनकर्मियों द्वारा महिलाओं को जबरन खींचकर बसों में बैठाने की बात सामने आई है। कुछ ग्रामीणों ने इसे अमानवीय और असंवेदनशील व्यवहार बताया। कई महिलाओं ने रोते हुए मीडिया से अपना दुख साझा किया।
छुरा ब्लॉक में शिफ्ट, गोंड समाज भवन में ठहराव
अधिकारियों ने हटाए गए लोगों को गरियाबंद जिले के छुरा ब्लॉक के पाटसेंद्री गांव में स्थायी पुनर्वास के बिना अस्थाई रूप से शिफ्ट किया है। फिलहाल उन्हें गोंड समाज भवन में रखा गया है। कई परिवारों को अन्य स्थानों पर भी ले जाया गया है। लोगों को इस बात की भी चिंता है कि बरसात से पहले जीवन यापन कैसे होगा।
सूचना छिपाई गई, अधिकारी लापता
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कार्रवाई मीडिया से छिपाकर की गई।
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अधिकारी मीडिया के सवालों से बचते नजर आए।
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कई अधिकारियों के मोबाइल फोन बंद मिले।
ग्रामीणों का आरोप और मांग
ग्रामीण संत कुमार खैरवार, गणेश यादव, रमेश ध्रुव आदि ने आरोप लगाया कि –
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उन्हें कोई नोटिस या पूर्व सूचना नहीं दी गई।
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रात में जबरन कार्रवाई की गई।
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प्रशासन को चाहिए था कि पुनर्वास की समुचित व्यवस्था करता।
उन्होंने शासन से मानवाधिकार उल्लंघन की जांच, पुनर्वास की गारंटी, और कृषि भूमि के वैकल्पिक आवंटन की मांग की है।
कानूनी पृष्ठभूमि और सवाल
छत्तीसगढ़ में वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत वन भूमि पर परंपरागत रूप से रहने वाले आदिवासी परिवारों को अधिकार देने की व्यवस्था है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन परिवारों के दावे को न्यायिक रूप से निपटाया गया था, या एकतरफा प्रशासनिक कार्रवाई की गई?
