Sunday, April 5, 2026
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बड़ी खबर : पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोपों में घिरी यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा, 12 TB डिजिटल डेटा से कई खुलासे

भारत की एक चर्चित यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने का गंभीर आरोप लगा है। हिसार की अदालत ने ज्योति को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मामले की जांच कर रही पुलिस ने उनके डिजिटल उपकरणों और ऑनलाइन अकाउंट्स से 12 टेराबाइट्स का डिजिटल फॉरेंसिक डेटा बरामद किया है, जिसने इस कथित जासूसी कांड की परतें खोल दी हैं।

डिजिटल डेटा में क्या-क्या मिला?

बरामद किए गए 12 TB डेटा में शामिल हैं:

  • चैट रिकॉर्ड्स

  • कॉल लॉग्स

  • वीडियो फुटेज

  • वित्तीय लेन-देन से संबंधित विवरण

  • विदेशी संपर्कों की जानकारी

सूत्रों के अनुसार, इस डेटा से ISI से जुड़े एक सुनियोजित ‘नैरेटिव पुश’ अभियान का भी पता चला है। नैरेटिव पुश एक ऐसी रणनीति होती है जिसमें मीडिया और सोशल मीडिया के ज़रिए जनमत को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।

सीधा संपर्क ISI नेटवर्क से

जांच में यह सामने आया है कि ज्योति का संपर्क पाकिस्तान मूल के चार लोगों से था, जो ISI के लिए काम करते हैं। संवाद मुख्यतः वन-टू-वन माध्यमों से हुआ ताकि डिजिटल ट्रेस न छोड़ा जा सके। पाकिस्तान द्वारा उन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट, विशेष वीजा और सुरक्षा कवच भी प्रदान किया गया था, जो सामान्यत: विदेशी पत्रकारों को भी नहीं मिलता।

सोशल मीडिया पर अचानक लोकप्रियता

पुलिस का मानना है कि ज्योति की अचानक सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता ऑर्गेनिक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित डिजिटल ऑपरेशन का हिस्सा थी, जिसमें पाकिस्तानी एजेंडे को परोक्ष रूप से बढ़ावा दिया गया।

राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के आरोप

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ज्योति की गतिविधियाँ एक सामान्य पत्रकार की सीमाओं से बहुत आगे निकल चुकी थीं। उन्हें राष्ट्र विरोधी तत्वों के साथ सक्रिय संलिप्तता में पाया गया है। बरामद डाटा में वित्तीय लेनदेन की जानकारियां भी शामिल हैं। अब जांच का अगला चरण यह पता लगाने का है कि उन्हें फंडिंग कहां से मिली और उसका मकसद क्या था।

लगातार निगरानी में थी यूट्यूबर

जांच एजेंसियों का कहना है कि ज्योति की पहली पाकिस्तान यात्रा के बाद से ही उस पर नजर रखी जा रही थी। उसके किसी प्रतिबंधित संस्था या नेटवर्क से संबंध होने की संभावना की भी जांच की जा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मामला

यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, डिजिटल स्पेस में दुष्प्रचार और अभिव्यक्ति की आज़ादी के दुरुपयोग को लेकर गहरी चिंता पैदा करता है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म अब राष्ट्रविरोधी ताकतों के लिए नया मोर्चा बनते जा रहे हैं।

जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे संभव हैं।

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