
दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग से दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक महिला ने अपनी ही छोटी बहन के 8 महीने के मासूम बेटे का अपहरण कर लाखों रुपये में बेच दिया। पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में महिला समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है।
क्या है पूरा मामला
दुर्ग के कसारीडीह निवासी पीड़िता सुखारिंग बाई ने महिला थाने में अपने 8 माह के बेटे के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, पीड़िता की बड़ी बहन संगनी बाई, जो पटना में एक ऑर्केस्ट्रा में डांस करती है, ने जून माह में उसे और बच्चे को पटना घूमने के लिए बुलाया था।
पीड़िता वहां पांच दिन रुकी, और फिर जुलाई माह में संगनी बाई अपने प्रेमी संतोष पाल के साथ उसे दानापुर रेलवे स्टेशन छोड़ने आई। स्टेशन पर खाना लाने का बहाना बनाकर दोनों पीड़िता के बेटे को गोद में लेकर गायब हो गए, और इसी दौरान ट्रेन भी छूट गई।
घर लौटने के बाद पीड़िता ने पति को सारी घटना बताई और फिर मामला महिला थाने में दर्ज कराया गया।
पुलिस ने बनाई विशेष टीम
शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीम का गठन किया और आरोपी संतोष पाल के मोबाइल की लोकेशन के आधार पर उसे हिरासत में लिया गया। पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए।
आरोपियों ने कबूला जुर्म
संतोष पाल की निशानदेही पर पुलिस ने संगनी बाई, प्रदीप कुमार, डॉ. बादल और गौरी महतो को भी हिरासत में लिया। पूछताछ में सभी आरोपियों ने अपहरण और बच्चे की बिक्री की साजिश को कबूल किया।
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संगनी बाई ने साजिश के तहत अपनी छोटी बहन को पटना बुलाया।
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उसने प्रेमी संतोष पाल के साथ मिलकर बच्चे का अपहरण किया और उसे प्रदीप कुमार को सौंपा।
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प्रदीप ने बच्चा डॉ. बादल को सौंपा।
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डॉ. बादल ने उसे 7 लाख रुपये में गौरी महतो को बेच दिया।
क्यों खरीदा गया बच्चा?
गिरफ्तार गौरी महतो की कोई संतान नहीं थी और पारिवारिक संपत्ति के वारिस की जरूरत थी। इसी कारण उसने अपने परिचित डॉक्टर से संपर्क कर बच्चा गोद लेने की व्यवस्था करवाई।
फिलहाल की स्थिति
पुलिस ने सभी पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया है। साथ ही बच्चे को भी सुरक्षित बरामद कर लिया गया है और उसे परिजनों को सौंपे जाने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
