रायपुर। भारत निर्वाचन आयोग ने छत्तीसगढ़ की 11 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों (RUPP) का पंजीयन रद्द कर दिया है। यह कार्रवाई उन दलों पर की गई है, जो पिछले छह वर्षों में किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाए और न ही आयोग को आवश्यक जानकारी समय पर मुहैया कराई।
आयोग ने इन दलों को अपने पक्ष में सफाई देने या फैसले को चुनौती देने के लिए 30 दिनों की मोहलत दी है। इसके बाद आयोग आगे की कार्रवाई करेगा।
क्या है कानून?
यह कार्रवाई लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत की गई है। इस कानून के अनुसार यदि कोई पंजीकृत राजनीतिक दल लगातार छह वर्षों तक किसी भी चुनाव में भाग नहीं लेता, और आयोग को अपनी गतिविधियों, पदाधिकारियों, पते व अन्य जानकारी समय पर नहीं भेजता, तो उसका पंजीयन रद्द किया जा सकता है।
देशभर में जांच, सैकड़ों पार्टियां हटाईं गईं
जून 2025 में निर्वाचन आयोग ने देशभर में 345 RUPP की सक्रियता और वैधानिक अनुपालन की जांच करवाई थी। जांच में पाया गया कि इनमें से 334 राजनीतिक दल निर्धारित मापदंडों पर खरे नहीं उतरे। मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर इनका नाम पंजीकृत सूची से हटा दिया गया।
अब देश में पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की संख्या घटकर 2520 रह गई है, जो पहले 2854 थी।
चुनावी व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा कदम
चुनाव आयोग ने इस निर्णय को चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार के लिए उठाए गए सतत प्रयासों का हिस्सा बताया है। आयोग का कहना है कि इससे बोगस या निष्क्रिय राजनीतिक दलों की पहचान और उन्हें हटाने की प्रक्रिया तेज होगी, जिससे चुनावी प्रक्रिया और अधिक साफ-सुथरी और विश्वसनीय बनेगी।
छत्तीसगढ़ में भी कई दल निष्क्रिय
छत्तीसगढ़ की जिन 11 पार्टियों का पंजीयन रद्द किया गया है, उनकी ओर से कोई राजनीतिक गतिविधि या चुनावी भागीदारी वर्ष 2019 से अब तक दर्ज नहीं की गई थी। आयोग की ओर से भेजी गई नोटिसों का भी कोई उत्तर समय पर नहीं मिला, जिससे यह कार्रवाई जरूरी हो गई।
