Monday, April 6, 2026
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चुनाव आयोग का राहुल गांधी पर पलटवार : झूठे आरोपों के लिए माफी मांगें या घोषणा पत्र दें

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर बार-बार लगाए जा रहे ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर आयोग ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि राहुल गांधी अपने आरोपों को लेकर गंभीर हैं तो वे नियमों के तहत एक घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन) दें, अन्यथा उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।

निर्वाचन आयोग ने अपने आधिकारिक ‘फैक्ट चेक’ हैंडल से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस नेता के आरोपों को एक बार फिर ‘भ्रामक’ और ‘बिना सबूत’ बताया। आयोग ने याद दिलाया कि कांग्रेस द्वारा वोटर लिस्ट को मशीन-रीडेबल फॉर्म में जारी करने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही “कमलनाथ बनाम चुनाव आयोग, 2019” मामले में खारिज कर दिया था।

सीसीटीवी फुटेज की मांग पर तंज

आयोग ने कहा कि यदि कोई उम्मीदवार चुनाव परिणाम को चुनौती देना चाहता है तो RP अधिनियम 1951 के तहत 45 दिनों के भीतर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सकता है। ऐसी स्थिति में सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित किया जाता है। लेकिन बिना किसी याचिका के लाखों मतदान केंद्रों के फुटेज को खंगालना अव्यावहारिक है — 1 लाख बूथों के फुटेज देखने में 1 लाख दिन यानी 273 साल लग जाएंगे।

कांग्रेस ने नहीं की विधिक पहल

ECI ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वोटर लिस्ट से संबंधित आपत्तियों के लिए RP अधिनियम 1950 की धारा 24 के तहत किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में शायद ही कोई औपचारिक अपील दायर की हो। आयोग का कहना है कि राहुल गांधी और उनकी पार्टी केवल मीडिया में बयानबाज़ी कर रही है, जबकि उन्होंने अब तक कोई लिखित शिकायत या शपथ-पत्र आयोग को नहीं सौंपा।

महाराष्ट्र मुद्दे पर भी स्पष्ट जवाब

आयोग ने बताया कि दिसंबर 2024 में राहुल गांधी ने महाराष्ट्र का मुद्दा उठाया था, जिस पर AICC के एक वकील ने पत्र लिखा था। आयोग ने इसका जवाब 24 दिसंबर को अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रकाशित किया था। बावजूद इसके राहुल गांधी यह कहते रहे कि आयोग ने कोई जवाब नहीं दिया।

घोषणा पत्र या माफी की मांग

आयोग ने कहा कि यदि राहुल गांधी अपने आरोपों पर विश्वास करते हैं, तो उन्हें मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 20(3)(ख) के तहत अपने दावे को समर्थन देने के लिए शपथ-पत्र देना चाहिए। यदि वे ऐसा नहीं करते, तो इसका सीधा अर्थ यह होगा कि वे अपने ही आरोपों पर भरोसा नहीं करते, और देश से क्षमा मांगनी चाहिए।

गौरतलब है कि हाल ही में राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से पाँच सवाल पूछे थे और चुनावों में व्यापक धांधली के आरोप लगाए थे, जिसे लेकर अब यह सियासी टकराव और तेज हो गया है।

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